आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्,
पंच तत्त्व की प्राप्ति करारी,
पौष्टाहार प्रसन्न चित्त-मन,
धर्म-कर्म का ध्यान पुरारी।
समय देश प्यारा मनुहारी,
सर्व सुख दाता रहें आभारी,
जन्म जन्मांतर 'शान्त' मंगलम्,
करे प्रशंसा जगती सारी।
'शान्त'
आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्,
पंच तत्त्व की प्राप्ति करारी,
पौष्टाहार प्रसन्न चित्त-मन,
धर्म-कर्म का ध्यान पुरारी।
समय देश प्यारा मनुहारी,
सर्व सुख दाता रहें आभारी,
जन्म जन्मांतर 'शान्त' मंगलम्,
करे प्रशंसा जगती सारी।
* यमुना-स्नानम् *
*
कार्तिक मास यमुना स्नानम्,
शेष ग्यारह गंगा जी भारी,
पावन प्रयागराज त्रिवेणी,
सूर्य तनूजा मौसम प्यारी।
स्वस्थ रक्खें ऋतु संधि काल में,
काल शनी की बहना न्यारी,
हरित लहर जल प्रात हिलोरें,
शरद करें कल्याण सुखारी।
* प्रतिस्पर्धा *
*
शुरू गुलाबी जाड़ा कार्तिक,
कार्तिकेय की कृपा लेकर,
याद करें पितृ महादेव को,
जग जननी आज्ञा लेकर।
अनुज मूस की करें सवारी,
स्वयं मयूरी,प्रभा लेकर,
जगती भ्रमण उड़े चढ़ कोमल,
तेज सवारी,आभा लेकर।
लौटे देखा गणपति चक्कर,
मात-पिता का कर बैठे,
आदि देव की हुई घोषणा,
अग्रज श्रम थोड़ा ऐंठे।
अर्धांग अर्धांगिनी परिक्रमा,
श्री गणेश बुद्धि से जीते,
मुरुगन बने देव सेनापति,
'शान्त' प्रतिस्पर्धा मीते।
कर लें श्रद्धालु स्नेह अर्पण,
आश्विन हर वर्ष बुलाने में,
आवाहन पूजन विविध विधा,
सन्तुष्ट ध्यान से मिलाने में।
रहे वरद हस्त परिजन मस्तक,
तब भी,अब भी, चमकाने में,
धन्य 'शान्त' आत्माएं सु कवच,
संसारी राह दिखाने में।
गंगा यमुना जल घटने लगा,
तटवर्ती जन आराम मिला,
कीचड-कान्दव,दधि-कान्दव बाद,
रह जाय न कमल खिले की गिला।
शासन संग कुदरत भी सहाय,
स्नान मार्ग स्वच्छ करने में,
तर्पण से पहले लगाएं डुबकी,
पितरों से अदृश्य ही मिलने में।
* देश दुलारा *
*
अपना देश दुलारा प्यारा, दुनियां का उजियारा है। सूर्योदय से सूर्यास्त का अद्भुत दृश्य नजारा है।
दिशा सुनहली से रूपहली, दिनकर
दृश्य अदृश्य होते,किरण जीवनी रहें बिखेरते,कोई जागते कोई सोते
चंदा चमक सितारा है। अपना देश दुलारा प्यारा,दुनियां का उजियारा है।
आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्, पंच तत्त्व की प्राप्ति करारी, पौष्टाहार प्रसन्न चित्त-मन, धर्म-कर्म का ध्यान पुरारी। समय देश प्यारा मनुहारी, ...