* आनन्दी बसन्त *
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आनन्दी बसन्त है, बारह मासी सन्त है, माघ शुक्ल पञ्चमी,शोभित दिगन्त है
केसरिया कुसुम्बी प्रीतम,
हलचल अनन्त है,पुष्पशर
स्रष्टाडम्बर,गद्गद कान्ता कान्त हैं।
मधुमासा आरंभ ऋतुवर,
हर्षित जीवजन्तु हैं, पियराई सरसों चौतरफा,
उल्लासित अंग तन्तु हैं।
वाक् देवी हंसवाहिनी, वीणा धारिणी 'शान्त' है,
नमन बुद्धिदायिनी,वरद्- हस्त विक्रान्त हैं।