Wednesday, 26 June 2024

कोकिल कू


कूक रही अमराही कोयलिया,

देख टिकोरे लटक रहे,

धीरे-धीरे फूल रहे संग,

धीरे-धीरे मटक रहे।

पूंछ उठा कर फुदके कोयलिया,

सखी-सहेली बुला रही,

प्रात पवित्र ध्वनि ऊपर प्रतिध्वनि

कारण घण्टी झुला रही।

आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्

आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्,  पंच तत्त्व की प्राप्ति करारी, पौष्टाहार प्रसन्न चित्त-मन, धर्म-कर्म का ध्यान पुरारी।  समय देश प्यारा मनुहारी,   ...