बांग कर्ण प्रिय अरुण शिखा की,
कू कू कोकिल प्यारी सी,
नक़ल बनाते बच्चे हंसते,
कृष्ण प्रिया की न्यारी सी।
मौसम फल राजा का आता,
मधुर सूचना पहुंचाती,
प्रकृति दूत कर देती मुनादी,
शान्त स्नेही जन हर्षाती।
आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्, पंच तत्त्व की प्राप्ति करारी, पौष्टाहार प्रसन्न चित्त-मन, धर्म-कर्म का ध्यान पुरारी। समय देश प्यारा मनुहारी, ...