Tuesday, 3 September 2024

यह प्रयाग है

 प्रयाग है, यह प्रयाग है,

यह प्रयाग है, यह प्रयाग है।


चौमासा है, शुभ मासा है,

गंगा सहायकीं बढ़ीं चढ़ीं,

कहीं ग्राम घुसीं, कहीं वन घुसीं,

जलधार लग जाती झड़ी।क्यों--


यह प्रयाग है, यह प्रयाग है,

यह प्रयाग है, यह प्रयाग है।


बजरंग डूबे, मक्रजध्वज महि, 

लुटिया डूबी रावण की,

तरना तारना विष्णु हस्त से,

त्रय तारिणी हर कण कण की। क्यों--यह प्रयाग है,यह प्रयाग है। 

यह प्रयाग है, यह प्रयाग 

है।

पुल से कूद जल करें तैराकी,

शर्तें जीतें हो बेबाकी,

दर्शक लें आनंद शूरता,

नहीं क्रिकेट है नहीं है हाकी।


यह प्रयाग है, यह प्रयाग है,

यह प्रयाग है, यह प्रयाग है।


रचना-दयाराम कुशवाहा 'शान्त'

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