बंधवा के लेटे बजरंगी को,
गंगा मैया नहलाती हैं,
डूबें तटवर्ती डूबा करें,
शासन प्रबन्ध करवाती है।
दर्शक गण बाढ़ दृश्य देखें,
पावन लहरें उफनाती हैं,
देवालय में पूजन वंदन,
नित पूजक जन की थाती है।
आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्, पंच तत्त्व की प्राप्ति करारी, पौष्टाहार प्रसन्न चित्त-मन, धर्म-कर्म का ध्यान पुरारी। समय देश प्यारा मनुहारी, ...