रक्षाबन्धन अवनिअवित्तम
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रक्षाबन्धन अवनिअवित्तम
कच्चे धागे का त्योहार,
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम,
स्नेह सुरक्षा जीवन सार।
बहन की राखी भ्रातृ- कलाई, शोभित प्रचलित-
अपरम्पार, यादें फरियादे'-
मर्यादे' निराकार साकार- बहार।
प्रत्यक्ष-परोक्ष की, मिलन- स्मृतियाँ, बचपन यौवन वृद्ध शुमार, आनंद मंगल-
खेले'दंगल, जाने अनजाने
अभिसार।
मिष्ठ सलोने स्वादिष्ट- व्यंजन, चमके मस्तक- टीका भार,'शान्त'कलाई-
राखी बन्धन, दे आजीवन
प्यार ही प्यार।
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रचना--दयाराम कुशवाहा 'शान्त'
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