* खेल बसन्ती *
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सब देखें खेला बासन्ती,
लहराती प्रकृति गतिवन्ती,
तरुवर शुष्क पात गिरे धरती, बीत चला मौसम हेमन्ती।
पीत चुनरिया उडे खेतों में
दृश्य-अदृश्य मोदित लाजवंती, सरसों पियराई
मनभायी, वातावरण छटा
रसवन्ती।
गगन,धरा देखे ललचाए,
जड-चेतन तन भ्रम अशान्ती; आतुर अंग, अनंग के वश में, पढने वाले,वेद वेदान्ती।
प्रमुदित ऋतुरानी- कल्याणी, कृपा शारदा दिशा दिगन्ती; आनन्द- मंगल सकल सुखी जन, 'शान्त' कामना, कान्ता- कान्ती।