Tuesday, 13 February 2024

रचना--दयाराम कुशवाहा 'शान्त' 12-02-2024 सोमवार

* खेल बसन्ती *
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सब देखें खेला बासन्ती,
लहराती प्रकृति गतिवन्ती,
तरुवर शुष्क पात गिरे धरती, बीत चला मौसम हेमन्ती।

पीत चुनरिया उडे खेतों में
दृश्य-अदृश्य मोदित लाजवंती, सरसों पियराई 
मनभायी, वातावरण छटा 
रसवन्ती।

गगन,धरा देखे ललचाए,
जड-चेतन तन भ्रम अशान्ती; आतुर अंग, अनंग के वश में, पढने वाले,वेद वेदान्ती।

प्रमुदित ऋतुरानी- कल्याणी, कृपा शारदा दिशा दिगन्ती; आनन्द- मंगल सकल सुखी जन, 'शान्त' कामना, कान्ता- कान्ती।

आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्

आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्,  पंच तत्त्व की प्राप्ति करारी, पौष्टाहार प्रसन्न चित्त-मन, धर्म-कर्म का ध्यान पुरारी।  समय देश प्यारा मनुहारी,   ...