* स्वस्ति-आगमन *
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बसन्त पंचमी स्वस्ति- आगमन, पीताम्बरा धरा ऊपर; पियराया प्रयाग- त्रिवेणी, ऋतुराजा धमके भू पर।
किसलय कल्ले तरु पौधों में, रंग विरंगे पुहुप खिले;
सरसों पियराई खेतों में,
कविता काव्य कवीन्द्र मिले।
मा' शारदा सरस्वती देवी,
भाव भवानी वीणा- धारिणी; कमल आसनी हंसवाहिनी,धन्य कल्याणी
वाक् दायिनी।
मौसम की महिमा अनुरागी, आनन्द मंगल बना रहे; जगत समन्वय 'शान्त' सन्तुलन,मधुमासा
गुनगुना रहे।