Wednesday, 14 February 2024

रचना--दयाराम कुशवाहा 'शान्त' 14-02-2024 बुधवार

 * स्वस्ति-आगमन *

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बसन्त पंचमी स्वस्ति- आगमन, पीताम्बरा धरा ऊपर; पियराया प्रयाग- त्रिवेणी, ऋतुराजा धमके भू पर।


किसलय कल्ले तरु पौधों में, रंग विरंगे पुहुप खिले;

सरसों पियराई खेतों में,

कविता काव्य कवीन्द्र मिले।


मा' शारदा सरस्वती देवी,

भाव भवानी वीणा- धारिणी; कमल आसनी हंसवाहिनी,धन्य कल्याणी

वाक् दायिनी।


मौसम की महिमा अनुरागी, आनन्द मंगल बना रहे; जगत समन्वय 'शान्त' सन्तुलन,मधुमासा

गुनगुना रहे।

आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्

आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्,  पंच तत्त्व की प्राप्ति करारी, पौष्टाहार प्रसन्न चित्त-मन, धर्म-कर्म का ध्यान पुरारी।  समय देश प्यारा मनुहारी,   ...