गंगा यमुना जल घटने लगा,
तटवर्ती जन आराम मिला,
कीचड-कान्दव,दधि-कान्दव बाद,
रह जाय न कमल खिले की गिला।
शासन संग कुदरत भी सहाय,
स्नान मार्ग स्वच्छ करने में,
तर्पण से पहले लगाएं डुबकी,
पितरों से अदृश्य ही मिलने में।
आंवला पूजन प्रातः भ्रमणम्, पंच तत्त्व की प्राप्ति करारी, पौष्टाहार प्रसन्न चित्त-मन, धर्म-कर्म का ध्यान पुरारी। समय देश प्यारा मनुहारी, ...